हम ही जीतेंगे कह दो ये सबसे मगर - कविता

फूल खिलने लगे गुलशन के मगर,
फूल गुमसुम हैं कितने घर के मगर.
कौन आया जहाँ में ये हलचल हुई.
आज डरने लगे लोग खुद से मगर.


दौड़ती-भागती ज़िन्दगी है थमी,
न आये समझ क्या गलत क्या सही.
सबकी आँखों में कितने सवालात हैं,
उनके उत्तर नहीं हैं मिलते मगर. 



लोग हैरान हैं और परेशान हैं,
खोजते मिलके कोई समाधान हैं.
एक पल में अँधेरा ये छंट जाएगा,
दीप विश्वास के रहें जलते मगर.

जिनकी कोशिश कोई साँस टूटे नहीं,
हम सब संग हैं वे अकेले नहीं.
है लड़ाई अनजान अदृश्य से,
हम ही जीतेंगे कह दो ये सबसे मगर.


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#हिन्दी_ब्लॉगिंग 

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