प्यार का एहसास - ग़ज़ल

तेरे खुशबू में भरे ख़त मैं जलाता कैसे,
प्यार में भीगे हुए ख़त मैं जलाता कैसे,
तेरे उन खतों को गंगा में बहा सकता नहीं,
आग बहते हुए पानी में लगा सकता नहीं,

वो ख़त आज भी मेरे दिल की दौलत हैं,
तूने जो छोड़ी है मेरे पास वो अमानत है.

जब कभी भी खुद को तन्हा पाता हूँ,
खतों के साथ तेरे पास पहुँच जाता हूँ.

नहीं होगा यकीन तुझको मगर कर ले,
दिल के कोने में ये एहसास जरा भर ले.

मेरे होने में तेरा अक्श नजर आता है,
मेरी आँखों में तेरा रूप उभर आता है.

अपनी मुहब्बत को झूठ बताएं कितना,
जो सच है वाकई में उसे छिपाएं कितना.

तेरी खातिर इक चुप सी लगा लेता हूँ,
तेरे खतों को कहीं अपने में छिपा लेता हूँ.

वो धड़कन हैं, साँसें हैं मेरी कोई क्या जाने,
तू ही न समझी तो कोई और भला क्या जाने.

++
कुमारेन्द्र किशोरीमहेन्द्र
12-09-2017

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