सोमवार, 31 अक्तूबर 2016

ओ भारतमाता के प्रहरी, है तुमको बारम्बार नमन

ओ भारतमाता के प्रहरी,
है तुमको बारम्बार नमन.

अडिग हिमालय है तुमसे,
तुमसे सागर में गहराई.
धरती की व्यापकता तुमसे,
तुमसे अम्बर की ऊँचाई.
ओ भारतमाता के प्रहरी,
है तुमको बारम्बार नमन.

तुमसे मुस्काता है बचपन,
तुमसे इठलाती है तरुणाई.
शौर्य तुम्हारा नस-नस में,
भर ले ज़र्रा-ज़र्रा अंगड़ाई.
ओ भारतमाता के प्रहरी,
है तुमको बारम्बार नमन.

तीन रंग की आज़ादी,
है लाल किले पर लहराई.
तुमसे है सम्मान, सबल,
है गरिमा भी तुमसे पाई.
ओ भारतमाता के प्रहरी,
है तुमको बारम्बार नमन.

जय वीरों की, जय सेना की,
देता है जयघोष सुनाई.
जले दीप से दीप कई तो,
देश है देता संग दिखाई.
ओ भारतमाता के प्रहरी,
है तुमको बारम्बार नमन.


2 टिप्‍पणियां:

राजा कुमारेन्द्र सिंह सेंगर ने कहा…

आपकी इस पोस्ट को आज की बुलेटिन ’नमन भूगोल रचने वाले व्यक्तित्वों को - ब्लॉग बुलेटिन’ में शामिल किया गया है.... आपके सादर संज्ञान की प्रतीक्षा रहेगी..... आभार...

प्रतिभा सक्सेना ने कहा…

तुमसे मुस्काता है बचपन,
तुमसे इठलाती है तरुणाई.
शौर्य तुम्हारा नस-नस में,
भर ले ज़र्रा-ज़र्रा अंगड़ाई.
- सचमुच इन्हीं के दम पर हम जीवन के विभिन्न रूपों का सहज-स्वाभाविक रूप से आस्वादन कर पाते हैं - हमारा नमन् उन्हें !