बुधवार, 15 अगस्त 2012

देखते होंगे खुद को आइने में और शरमाते भी होंगे

देखते होंगे खुद को आइने में और शरमाते भी होंगे,

सजाते होंगे मन में हमारे सपने और लजाते भी होंगे।

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एक एक लम्हा मिलन का वो सजोये हैं दिल में अपने,

गुदगुदाते भी होंगे जो उन्हें और कभी रुलाते भी होंगे।

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ख्वाब में मिलने की कोशिश और नींद आंखों में नहीं,

याद करके हमें रात सारी करवटों में बिताते भी होंगे।

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बिना कहे ही बहुत कुछ कह जाती है गालों की सुर्खी,

पूछने पर सबब चेहरे को हथेलियों से छिपाते भी होंगे।

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निहारते हैं घंटों मेरी तस्वीर को किताब में छिपा कर,

और तन्हाई में कभी-कभी अपने होंठों से लगाते भी होंगे।

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मिलते हैं लोगों से वो लबों पर एक चुप सी लगा कर,

बेपर्दा न हो जाये प्यार कहीं सोच कर घबराते भी होंगे।

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खुद नहीं करते हैं कभी भूले से मेरी बातों का चर्चा,

पर जिक्र होने पर मेरा खुशी से चहक जाते भी होंगे।

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उनके हर एक कदम से उठती है नफासत की खुशबू,

कांधों से फिसलता आंचल पल-पल संभालते भी होंगे।

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