शुक्रवार, 13 मई 2011

असंवेदनशीलता -- लघुकथा

रास्ते पर भागमभाग मची हुई थी। सभी लोग एक प्रकार की हड़बड़ी सी दिखाते हुए एक ही दिशा में भागे चले जा रहे थे। यह समझ में नहीं आ रहा था कि अचानक ऐसा क्या हो गया है कि बाजार में इस तरह की अफरातफरी का माहौल बना हुआ है।

दो-एक को रोक कर पूछने की कोशिश की पर कोई न ही रुका और न ही किसी ने रुकने का मन दिखाया। चूँकि मुझे जाना भी उसी ओर था जहाँ से लोग भागमभाग की स्थिति में चले आ रहे थे। मन में एक डर सा पैदा हुआ कि कहीं कुछ ऐसा घटित न हो गया हो जिससे उस ओर जाना घातक हो जाये।

कई लोगों को रोकने की कोशिश में अन्ततः अपने एक परिचित दिखाई दिये। वे मेरे एक-दो बार पुकारने के बाद रुके तो पर ऐसे जैसे कि किसी अतिशय जल्दबाजी में हैं और हम उनका समय नष्ट कर रहे हैं। जब मैंने इस भागदौड़ का संदर्भ जानना चाहा तो उन्होंने बताया कि उस तरफ सड़क पर एक दुर्घटना हो गई है, एक युवक घायलावस्था में सड़क पर पड़ा है। उसके साथ की युवती उसके लिए मदद को पुकार रही है और कोई पुलिस के लफड़े में नहीं पड़ना चाहता, इस कारण से....।

इस भागमभाग का पूरा अर्थ समझ में आ गया था। अब मैं भी उस तरफ जाने के बारे में सोच-विचार करने लगा था।

1 टिप्पणी:

ANKESH JAIN ने कहा…

Whatever you wrote is truth at most of the places but we need to make people more aware about following thing.

"Supreme Court has announced, any person who meets road accidents can be taken to... nearby hospital immediately. Hospital must not ask for police report to admit him,its doctors' duty to do First-aid. Police can be informed later."